ॐ ह्रीँ श्री शंखेश्वरपार्श्वनाथाय नम: દર્શન પોતે કરવા પણ બીજા મિત્રો ને કરાવવા આ ને મારું સદભાગ્ય સમજુ છું.........જય જીનેન્દ્ર.......

श्री शांतिनाथ जैन मंदिर रूपनगर दिल्ली


હોઠ ના કિનારે વેહતી ;
જીભ ની નદી માંથી 
વાણી ના પ્રવાહ રૂપે 
આપના હ્ર્દય💓 માં આ ભવિક જીવ🙋🏻‍♂ ના કારણે હરિયાળી સર્જવાના બદલે હોનારત સર્જાઈ હોય.......
મારા થકી આપે મહદઅંશે પણ અશાતા અનુભવી હોય ......
અનાયાસે આપની "સંવેદના" સાથે રમત રમાઈ હોય ......
લાગણીઓને જરા પણ ઠેસ પહોંચાડવાનુ કોઈ કુકર્મ કર્યું હોય........તો સંવત્સરી મહાપર્વ ની આરાધના કરતા પહેલા
મન- વચન- કાયા થી આપ સર્વ ને મારા અંતઃકરણ પૂર્વક મિચ્છામી દુક્કડમ્ 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

*पर्यूषण महापर्व के आज क्षमापना दिवस पर सभी संत- सतियों के चरणों में कोटिशः वंदना करते हुए तपोमय शरीर की सुखसाता पूछते हुए मंगल कामना करते हुए अविनय असातना के लिए क्षमा याचना !*
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*भगवान् ने सभी को धनुष के आकार के होंठ दिये हैं, मगर इनसे शब्दों के बाण ऐसे छोङिये, जो सामनेवाले के दिल को छू जाये ना की दिल💘 को छेद जाये!*
*बिगङे काम बनाती है वाणी, बने बनाए काम भी बिगड़ जाते हैं, अनजाने रिश्ते जोड़ देती है वाणी, तो वर्षो के रिश्ते भी झगङ जाते हैं!*
*ज्यूं छूटता है तीर तरकस से, वाणी का तीर हृदय को छू जाता भर जाता है घाव तीर का मगर वाणी का जख्म कभी नहीं भरता।*
*जब से आपका हमारा परिचय हुआ है तब से लेकर आजतक मुझसे अथवा मेरे परिवार द्वारा आपका अपमान किया हो, आपका दिल दुखाया हो,आपकी निंदा या बुराई की हो, आपसे ईर्ष्या की हो, आपको कर्कश वचन कहे हों,आपका मजाक उङाया हो , आपकी उपेक्षा की हो इत्यादि॰॰॰*
*जिस प्रकार भी अनुचित आचरण या व्यवहार आपके द्रष्टिकोणसे मुझसे हुआ हो अथवा उपरोक्त नादानीयां व गलतियाँ मुझ से जाने अनजाने में हुई हों तो हाथ जोड़कर!*
*खामेमि सव्व जीवे, सव्वे जीवा किन्तु में मित्तिमें सव्व भुवेषु वेर मज्झ न केणई!*
*👾मैंने अहंकार में॰॰ किसी को नीचा दिखाया हो, क्रोध में किसी को दुःखी किया हो, झूठ से किसी का दिल जला हो, मेरी ना से किसी के दान सेवा कार्य में वाधा आयी हो मैंने प्रपंच से किसी को निराश किया हो😴 एक वर्ष□ १२ माह□ २४पक्ष□ ३६५ दिन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आपका तथा आपके परिवार का, व फेसबुक, वाट्सप पर पोस्ट द्वारा जाने अनजाने में किसी का भी किसी भी प्रकार से दिल को ठेस पहुंची हो तो शीश झुकाकर हाथ 🙏जोड़कर हृदय के मनभरे भावों से इस अवसर पर परिवार सहित मैं बारंबार क्षमा याचना करता हूँ।*
*क्षमा करें और क्षमा मांगलें जीत है इसमें हार नहीं, क्षमा वीर का भूषण है यह कायर का व्यवहार नहीं!*
*देश- देश को जाती-जाती को, व्यक्ति व्यक्ति को क्षमा करें , अपने अपराधी को ढूंढ ढूंढकर क्षमा करें , विश्व मैत्री का मूल मंत्र यह "केवल शिष्टाचार नहीं।।*
*"""एक बार पुनः सभी से क्षमा याचना 🙏🙏🙏🙏करता हूँ।।*

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BEST REGARDS:- ASHOK SHAH & EKTA SHAH
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